उत्तर प्रदेश: वाराणसी स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हैंडलूम टेक्नोलॉजी में विदेश मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से दो सप्ताह का अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसमें 16 देशों से आए लगभग 32 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बनारसी सिल्क और भारतीय हथकरघा वस्त्रों की विशेषताओं, निर्माण प्रक्रिया और परंपरागत बुनाई तकनीकों की जानकारी दी गई। समापन समारोह में मुख्य अतिथि भारतीय हथकरघा संस्थान चौकाघाट के निदेशक ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत की सांस्कृतिक और शिल्प विरासत को दुनिया तक पहुँचाने का माध्यम है। विदेशी प्रतिभागियों ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें यहां रहना, खाना और प्रशिक्षण उच्चस्तरीय मिला। उन्होंने इसे अभूतपूर्व अनुभव बताते हुए आश्वासन दिया कि वे अपने-अपने देशों में सीखी हुई तकनीकों और जानकारियों को साझा करेंगे। कार्यक्रम से भारत के हथकरघा और बनारसी सिल्क की वैश्विक पहचान को नई ऊर्जा मिली और प्रतिभागियों ने इसे बेहद सुखद और उपयोगी बताया।
